Best Samrat Ashok 2020

All about Samrat Ashok: आज हम बात करेंगे महान सम्राट अशोक (samrat ashok) के बारे में अशोक एक मोर वंश का सफलता सकता है इस बात को सभी इतिहासकार मानते हैं अशोक के पिता का नाम बिंदुसार तथा दादा का नाम चंद्रगुप्त मौर्य है माता का नाम  सुभद्रंगी थाl सम्राट अशोक की 5 पत्नियां थी 1. देवी 2. करुवाकी 3. असंधिमित्रा 4. पद्मावती 5. तिस्यर्क्षिता थी अशोक सम्राट का जन्म 304 ईसा पूर्व हुआ था पता अभी चलता है कि अशोक का निधन 232 ईसा पूर्व हुआ था लेकिन उसका निधन कहां और कैसे हुआ यह पूरी तरह से कहा नहीं जा सकता इसके उतने पुख्ते प्रमाण  नहीं मिल पाते हैंl 

Samrat ashok
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सम्राट अशोक के वैसे तो कई सारे पुत्र थे लेकिन इतिहास में ज्यादातर इतिहासकारों ने दो का नाम सामने रखा है पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा एक पुत्री का नाम चारुमति भी था वैसे ही एक और पुत्र जिसका नाम फीवर और तीसरे पुत्र का नाम कुणाल था वैसे बिंबिसार के 16 पत्नियां थी और 101 पुत्र थे जिसमें से एक अशोक भी थाl 

अशोक महान ने अपने जहां-जहां साम्राज्य स्थापित किया वहां वहां स्तूप बनवाए कहा यह भी जाता है के उनके हजारों वस्तु को को मध्यकाल के मुस्लिम मुस्लिमों ने ध्वस्त कर दिया है कहते हैं कि 30 वर्षों के शासन में लगभग 84000 वस्तुओं का निर्माण अशोक ने करवाया था अपने धर्म लेखों और स्थान पर अंकन के लिए ब्राम्ही और खरोष्ठी लिपि का उपयोग किया थाl 

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एक ऐसा व्यक्ति जिसने मानव सभ्यता का  तथा प्राचीन भारतीय इतिहास का एक चमकता हुआ सितारा अशोक एक महान सम्राट था सभी इतिहासकारों की दृष्टि से अशोक का शासन काल स्वर्णकाल कहलाता है अपने साम्राज्य तथा दक्षिण भारत से व्यापार की इच्छा हेतु अशोक ने 261 ईसा पूर्व कलिंग पर आक्रमण किया l 

 हुआ था वहां राधा आरंभ होती है महान सम्राट अशोक ने कलिंग पर आक्रमण करने के लिए वर्तमानहरिराम का कलिंग सेना में सैनिकों को दिखा देना पतिदेव ने अपने सैनिकों के साथ मगध के सेनानायक को हमारा शत-शत अवस्था में नालायक को इवनिंग चुनौती देकर लौटे और और सबसे बड़ी बात पूछना चाहते हो कृपया मेरी मदद  पतंगों के तरफ पलायन कर रहे बढ़ रहे अपराध गलियों मार डाला l 

गया नदी के स्थित धनबाद दे  एक बार किया था उनका पूरा नाम अशोक बिंदुसार मौर्य है और इनका जन्म स्थान पाटलिपुत्र में इनके पिता का नाम था राजा बिंदुसार अशोक मौर्य शासक बिंदुसार और माता शुभांगी के बेटे के रूप में और मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य के पोते के रूप में जन्म लिया इनका पूरा नाम देवा नाम अशोक मौर्य जो कि राजा प्रियदर्शी देवताओं के प्रति उन्हें मौर्य साम्राज्य का तीसरा शासक माना जाता हैl

 ऐसा कहा जाता है कि सम्राट अशोक सम्राट बनाने में आचार्य चाणक्य का बहुत बड़ा योगदान रहा उन्हें शाही प्रशिक्षण दिया गया श्रेणी के अधिकारी भी कहलाते हैं उन्होंने केवल लकड़ी की छड़ी से शेर का शिकार किया था जिंदादिल शिकारी और साहसी जो था उनके इसी गुणों के कारण उन्हें उस समय मौर्य साम्राज्य के अवंती में हो रहे दंगों को रोकने के लिए भेजा गया l

 दोस्तों मौर्य साम्राज्य सम्राट अशोक ने अफगानिस्तान के हिंदुकुश में अपने साम्राज्य का विस्तार किया था उनके साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र जोकि मगर आज का बिहार है और साथ ही उपराजधानी तक्षशिला और उज्जैन ही थी अशोक ने अपने आप को कुशल प्रशासक करते हुए 3 साल के अंदर ही राज्य में शांति स्थापित किए l

 शासनकाल में देश में विज्ञान और तकनीक के साथ-साथ चिकित्सा में काफी तरक्की की उन्होंने ईमानदारी और सच्चाई के रास्ते पर चलने लगे चोरी और लूटपाट की घटनाएं बिल्कुल बंद हो अशोक मानवतावादी थी जनता की भलाई के काम किया करते थे उन्हें विशाल साम्राज्य के किसी भी हिस्से में होने वाली घटना की जानकारी रहती थी धर्म के प्रति आस्था थीl 

 इसका अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह बिना 1000 ब्राह्मणों को भोजन कराएं स्वयं कुछ नहीं खाते थे कलिंग युद्ध अशोक के जीवन का आखिरी युद्ध था जिससे उनका जीवन ही बदल गया अशोक ने कलिंग राज्य के खिलाफ एक विध्वंस का युद्ध की घोषणा की थी उन्होंने जीत हासिल की इससे पहले उसने ऐसा नहीं किया थाl 

Samrat ashok
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कल के युद्ध में कई लोगों की मृत्यु होने के बाद अशोक ने बुद्ध धर्म को अपना लिया था कहा जाता है कि अशोक के कलिंग युद्ध में तकरीबन 100000 लोगों की मौत हुई थी और डेढ़ लाख लोग घायल हुए थे इस युद्ध में हुए भारत-पाक दुष्परिणाम है और जीवन में फिर कभी युद्ध करने का धर्म परिवर्तन का मन बना लिया उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लियाl

 और अहिंसा के जारी हो गए बुद्ध धर्म के प्रचार के लिए संभव और स्तूप का निर्माण करवाया अशोक के अनुसार बुद्ध धर्म सामाजिक और राजनीतिक एकता वाला धर्म था बुध का प्रचार करने के लिए उन्होंने अपने राज्य में जगह-जगह पर भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं स्थापित की और बुद्ध धर्म का विकास करते चले गए बौद्ध धर्म को अशोक नहीं विश्व धर्म के रूप में मान्यता दिलाईl

 विदेशों में बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अशोक ने अपने पुत्र और पुत्री को भिक्षु भिक्षु डी के रूप में भारत से बाहर भेजा सार्वजनिक कल्याण के लिए उन्होंने जो कार्य किए इतिहास में अमर हो गए नैतिकता उदारता भाईचारे का संदेश देने वाले अशोक ने कई अनुपम भवनों और देश के कोने कोने में संभव और शिलालेखों का निर्माण भी करायाl

जिन पर बौद्ध धर्म के संदेश अंकित भारत का राष्ट्रीय चिन्ह अशोक चक्र और शेर की त्रिमूर्ति भी अशोक महान की देन है यह कृतियां अशोक निर्मित वस्तुओं पर अंकित है सम्राट अशोक का अशोक चक्र जिसे धर्म चक्र भी कहा जाता है आज वह हमें भारतीय गणराज्य के तिरंगे के बीच में दिखाई देता है मूर्ति सारनाथ वाराणसी में बौद्ध स्तूप के संबंध में मूर्तियों की प्रतिकृति है अशोक का अर्थ दर्द रहित या फिर चिंता मुक्त होता हैl

 अपने आदेश पत्र में उन्हें देवनाम्प्रिया और कहा जाता है कहा जाता है कि सम्राट अशोक का नाम अशोक के पेड़ से ही लिया गया था किताब है जिसका नाम है इतिहास में अशोक को हजारों नाम से जानते हैं जहां जहां उनकी वीरता के हैं उनकी गाथा पूरे इतिहास में प्रचलित है दयालु और शक्तिशाली सम्राट लोकहित के नजरिए से देखा जाए तो की चिंता की बल्कि उन्होंने जीव मात्र के लिए कई सराहनीय काम भी किए हैंl

 सम्राट अशोक को एक राजा और युद्ध माना जाता है अपने शासन काल के समय में सम्राट अशोक अभी तक पहुंचाने के लिए लगातार 8 सालों तक लड़ते रहे जिसके चलते सम्राट अशोक ने कृष्ण गोदावरी की घाटी में मैसूर में भी अपना कब्जा कर लिया लेकिन तमिलनाडु केरल और श्रीलंका पर नहीं कर पाए सम्राट अशोक महान इतिहास में कोई दूसरा दिखाई देगाl

 आकाश में तारे की तरह है जो हमेशा ही रहता है भारतीय इतिहास का यही चमकता तारा सम्राट अशोक प्रजापत शासक के रूप में उनका नाम अमर रहेगा और कार्य किए वैसा अन्य कोई नहीं कर सका सम्राट अशोक ने लगभग 40 वर्षों तक शासन किया इसके आसपास इतिहास में अशोक महान एक अतुलनीय चरित्र है भारतीय इतिहास के रूप में रहेंगेl 

अंतिम शब्द: All about Samrat Ashok

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