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rashtriya ekta diwas|national unity day

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rashtriya ekta diwas : हेलो दोस्तों आज हम बात करेंगे राष्ट्रीय एकता दिवस के बारे में राष्ट्रीय कब मनाया जाता हैl जैसा कि आप सभी जानते हैं राष्ट्रीय एकता दिवस 31 अक्टूबर को मनाया जाता है क्योंकि सरदार वल्लभभाई पटेल काजल काजल 31 अक्टूबर अट्ठारह सौ पचास नडियाद बांबे  प्रेसीडेंसी में हुआ था और उनकी मृत्यु 15 दिसंबर 1950 ईस्वी को बांबे में हुआ था सरदार वल्लभभाई पटेल के पिता का नाम श्री झाबेरभाई पटेल और माता का नाम श्रीमती लाडला देवी था l 

सरदार वल्लभभाई पटेल राजनीति में भी सक्रिय उसे भी बहुत बड़े स्वतंत्रता सेनानी सरदार बल्लभ भाई पटेल दो लौह पुरुष के नाम से जाना जाता था आजादी के बाद अपने जीवन काल में भारत के तीनों को मिलाकर भरतपुर के कारण करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी भारत के टुकड़े होने से बचाया था l 

rashtriya ekta diwas
rashtriya ekta diwas

राष्ट्रीय एकता में सरदार वल्लभभाई पटेल का योगदान|national unity day

देसी रियासतों को भारत में मिलाने का साहसिक कार्य सरदार पटेल के  प्रयासों से संभव हो सका जब 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ उस समय लगभग 562 अधिकांश भारत में मिलने से मना कर दिया सरदार वल्लभभाई पटेल 562  रियासतों का एकीकरण और भरत को टूटने से बचा लिया इतिहास मैं हुआ एक अनोखा कार्य है इसीलिए सरदार वल्लभ भाई पटेल को लौह पुरुष कहा जाता था l 

rashtriya ekta diwas
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राष्ट्रीय एकता का  शपथ|rashtriya ekta diwas

rashtriya ekta diwas : मैं सत्य और निष्ठा की शपथ लेता हूं की राष्ट्र की एकता अखंडता को बनाए रखने के लिए स्वयं को समर्पित करूंगा  और अपने देशवासियों के बीच यह संदेश पहुंचाने का प्रयास करूंगा कि सभी एकता और अखंडता बनाए रखें मै अपने सारे  देशवासियों को देश की एकता को बनाए रखने के लिए  आग्रह करता हूं  जिससे कि पूरे देश में कहीं भी किसी भी जाति और संप्रदाय के  लोगों के बीच  भ्रम ना फैलाएं सरदार वल्लभभाई पटेल की के द्वारा बनाया  गया देश की रक्षा की बीमारी अब हम सभी देशवासियों के  कंधों पर हैl 

 इस बात को ध्यान में रखते हुए हम सभी चाहे हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई या अन्य किसी भी जाति या धर्म को मानने वाली जितने भी लोग हैं सभी इस देश की अखंडता को बनाए रखने की मदद करें और देश को एक नई ऊंचाई की ऊंचाइयों को लेकर जाएl 

राष्ट्रीय एकता पर निबंध|rashtriya ekta diwas

 प्रस्तावना 

rashtriya ekta diwas : भारत एक ऐसा देश है जिसे की कृषि भर्तियों के धरती पर आ जाता है यहां पर बहुत सारे जाट धर्म कर्म के लोग रहते हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि सभी मिलकर यहां पर रहते हैं चाहे हिंदू हो मुस्लिम सिख  ईसाई बौद्ध इत्यादि किसी भी धर्म को मानने वाला हो इस देश में सभी मिल कर रहते हैंl

हमें हमारे जीवन में राष्ट्रीय एकीकरण के अर्थ को समझने की जरूरत है और अपने देश को एक पहचान देने के लिये वह सारे काम करने चाहिए जो कि राष्ट्र हित में हो सभी जात धर्म दल के लोगों को यह किसी भी देवता अल्लाह गुरु प्रभु को मानते किशोर को मांगते हैं उन सभी को एक साथ मिलकर के देश के बल को बढ़ाने के लिए कार्य करना चाहिए फिर भी हमारे देश में इस तरह की व्यवस्था नहीं हो पा रहा क्योंकि राजनीतिक पार्टियाँ कभी भी एक स्वर में भारत की अखंडता के लिए आवाज़ उठाने में सक्षम नहीं रहती राजनीतिक पार्टियों को अपनी कमियों कमी को दूर करना चाहिए और देश की अखंडता के बारे में विचार करना चाहिए उसके कार्य करना चाहिएl 

राष्ट्रीय एकता के लाभ 

rashtriya ekta diwas

अलग धर्म और जाति के होने के बावजूद भी हमारे देश के लोगों मैं अपने खून और पसीने से किस देश को आजाद कराया उसमें सभी भुजाएं हिंदू हो मुसलमान को या फिर सीख सभी लोगों का  बलिदान देने के बाद ही देश को आजादी मिली इसीलिए हम अलग-अलग जाति और धर्म को के होने के बाद भी देश को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं हमारे यहां किसी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं क्योंकि अनेकता में एकता को मानने वाला यह देश रहा है हमारा देश विश्व में विश्व के सबसे बड़े देशों में दूसरे स्थान पर आता है ऐसा दूसरे कई देशों में नहीं देखने को मिलता यहां की अलग-अलग जांच के धर्म के लोग एक साथ मिलकर रहते हैंl 

हमारे देश में लगभग 1652 भाषाएं बोली जाती है  130 करोड़ जनसंख्या वाला देश  है जो कि दुनिया में  सिर्फ चीन की जनसंख्या से कम  देखने को मिलता है सभी जाति और धर्म के लोग एक समान एक ही देश में रहते हैं सबके लिए एक ही कानून है जो जैसे चाहे रह सकता है जिस धर्म को मानता है मान सकता है किसी भी संवैधानिक पद पर खुद को अपनी मेहनत के बल पर स्थापित कर सकता है कोई रोकने वाला नहीं है ऐसा जबकि ऐसा व्यवस्था भारत के अलावा किसी भी अन्य देशों में देखने को नहीं मिलता l 

national unity day
national unity day

राजनीतिक एकता 

rashtriya ekta diwas

हमारे देश में राजनीतिक एकता की भारी कमी है ऐसा सिर्फ एक बार हुआ है जबकि सारी पार्टियाँ मिलकर लड़ी थी और वह हुआ था सन 1947 जबकि देश को आजाद  कराना था उसके बाद राजनीतिक एकता में  फुट टूट पड़ी गई और राष्ट्रीय एकता को छोड़ कर के सब खुद के बारे में सोचने लगे अब वैसे नहीं रहेl  जैसा कि देश को आजाद कराने के लिए हुआ करते आज की राजनीतिक पार्टी और उस समय की राजनीतिक पार्टी में बहुत बड़ा अंतर यह है आज की राजनीतिक पार्टी अपने फायदे के लिए कार्य करती है और उस समय भी राजनीतिक पार्टी राष्ट्रहित मैं काम करती थी अंग्रेजो के बहुत प्रयास करने के बाद भी उस समय के नेता झुके नहीं और आज के दौर के नेता तो खुद की कुर्सी के लिए आपस में एक दूसरे के साथ नेता लड़ते रहते हैंl 

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