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pushp ki abhilasha poem in hindi

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pushp ki abhilasha poem in hindi :  बहुत ही  प्रसिद्ध कविता है जो कि माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा लिखी गई है| इस पोस्ट के माध्यम से कविता को आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं |इसका शीर्षक है पुष्प की अभिलाषा| इस kavita के माध्यम के कवी यह समझाना चाहते है| देश के मर मिटने के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए |और यही कामना एक पुष्प की मै भी देश के काम आऊ|

pushp ki abhilasha poem in hindi
pushp ki abhilasha poem in hindi

pushp ki abhilasha poem in hindi :

चाह नहीं मैं सुरबाला के

  गहनों में गूँथा जाऊँ,

चाह नहीं, प्रेमी-माला में

  बिंध प्यारी को ललचाऊँ,

pushp ki abhilasha poem in hindi

चाह नहीं, सम्राटों के शव

   पर हे हरि, डाला जाऊँ,

चाह नहीं, देवों के सिर पर

   चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ।

मुझे तोड़ लेना वनमाली!

  उस पथ पर देना तुम फेंक,

मातृभूमि पर शीश चढ़ाने

जिस पथ जावें वीर अनेक|

pushp ki abhilasha poem in hindi
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pushp ki abhilasha poem in hindi का अर्थ

कविता के माध्यम से पुष्प कहना चाहता है कि मुझे चाह नहीं है कि मैं सुरबाला के गले में क्या उसके हार पहनने के काम आऊं|

 पुष्प कहता है कि मुझे इच्छा नहीं है|की मैं किसी औरत या किसी प्यारी लड़की को   लालचाऊ|

 पुष्प  कहता है की हे ईश्वर मुझे बिल्कुल चाह नहीं है | कि मैं सम्राटों के शव पर चढ़ाया जाऊं|

 मुझे चाह नहीं कि मैं किसी भगवान या किसी देवता के ऊपर  चढ़ाया  जाऊं| और अपने भाग्य पर  इतराता   रहूं|

 पुष्प वनमाली से  आग्रह करता है| हे वनमाली मुझे तोड़ने के बाद मुझे उस पथ पर फेंक दो जिस पथ का उपयोग कर | हमारे देश के जवान सीमा पर लड़ाई करने जाते हैं या अपने जीवन की बलिदानी देने जाते हैं|

pushp ki abhilasha
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माखनलाल चतुर्वेदी की जीवनी

माखनलाल चतुर्वेदी का जन्म मध्यप्रदेश में हुआ था उनके पिता का नाम नंद लाल चतुर्वेदी था| जो कि एक प्राइमरी टीचर थे|माखनलाल चतुर्वेदी को संस्कृत ,गुजराती बांग्ला. अंग्रेजी भाषाओं का ज्ञान था|

 बहुत विख्यात और बड़े कभी हुए उनकी एक कविता बहुत ही फेमस हो जिसका नाम था पुष्प की अभिलाषा|

 उन्होंने अंग्रेजो के खिलाफ कविताओं के माध्यम से यह आपने लेखनी के माध्यम से मोर्चा खोल रखा है जिससे कि युवा पीढ़ी बहुत प्रभावित हुई और बड़ी संख्या में युवा पीढ़ी ने आजादी के आंदोलन में हिस्सा लिया|

माखनलाल चतुर्वेदी की रचनाएं बहुत ही सरल भाषा होती थी जिसे हर कोई पढ़कर और आसानी से समझता था|

माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा लिखी गई कविताओं का संग्रह नीचे दिया गया है| 

  • हिम तरंगिनी -:माखनलाल चतुर्वेदी
  • अंजलि के फूल गिरे जाते हैं-: माखनलाल चतुर्वेदी
  • अमर राष्ट्र -:माखनलाल चतुर्वेदी
  • आज नयन के बँगले में -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • इस तरह ढक्कन लगाया रात ने -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • उठ महान -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • उपालम्भ -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • उस प्रभात, तू बात न माने, -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • ऊषा के सँग, पहिन अरुणिमा -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • एक तुम हो -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • कुंज कुटीरे यमुना तीरे -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • कैदी और कोकिला -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • कैसी है पहिचान तुम्हारी -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • क्या आकाश उतर आया है -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • गंगा की विदाई -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • गाली में गरिमा घोल-घोल -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • गिरि पर चढ़ते, धीरे-धीर -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • घर मेरा है?-: माखनलाल चतुर्वेदी
  • चलो छिया-छी हो अन्तर में -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • जवानी -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • जागना अपराध -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • जाड़े की साँझ -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • जीवन, यह मौलिक महमानी -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • झूला झूलै री -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • तान की मरोर -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • तुम मन्द चलो -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • तुम मिले -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • तुम्हारा चित्र / माखनलाल चतुर्वेदी
  • दूबों के दरबार में -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • नयी-नयी कोपलें -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • पुष्प की अभिलाषा -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • प्यारे भारत देश -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • फुंकरण कर, रे समय के साँप -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • बदरिया थम-थमकर झर री ! -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • बलि-पन्थी से -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • बसंत मनमाना -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • भाई, छेड़ो नही, मुझे -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • मचल मत, दूर-दूर, ओ मानी -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • मधुर! बादल, और बादल, और बादल -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • मधुर-मधुर कुछ गा दो मालिक -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • मुझे रोने दो -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • मैं अपने से डरती हूँ सखि -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • यह अमर निशानी किसकी है? -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • यह किसका मन डोला -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • ये प्रकाश ने फैलाये हैं -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • ये वृक्षों में उगे परिन्दे -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • यौवन का पागलपन -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • लड्डू ले लो -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • वरदान या अभिशाप? -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • वेणु लो, गूँजे धरा -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • संध्या के बस दो बोल सुहाने लगते हैं -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • समय के समर्थ अश्व -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • साँस के प्रश्नचिन्हों, लिखी स्वर-कथा -: माखनलाल चतुर्वेदी
  • सिपाही -: माखनलाल चतुर्वेदी

final Words

 और अंत में मैं आप सभी से यही कहना चाहूंगा की’ माखनलाल चतुर्वेदी बहुत ही प्रसिद्ध और सरल भाषा कवी हुए| उन्होंने भारत के आजादी में बहुत योगदान दिया| उनकी कविता पुष्प की अभिलाषा मानो आजादी की लड़ाई में जान फूक में काम आए  थी|

 कविता कैसी लगी जरूर बताएं साथ ही साथ अपने दोस्तों के साथ pushp ki abhilasha poem in hindi जरूर शेयर करें| ताकि हिंदी के  हिंदी के बारे में हमारी युवा पीढ़ी आसानी से जान सके| धन्यवाद|

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