Lohri kyu manaya jata hai

आज हम बात करेंगे lohri के बारे में जैसा कि आप सभी जानते हैं कि भारत एक ऐसा देश है जहां लगभग सभी प्रकार के सभी जातियों के सभी धर्मों के लोग यहां रहते हैं अनेकों प्रकार के पर्व मनाए जाते हैं उसी प्रकार एक पर्व का नाम है  लोहड़ी (lohri) उत्तर भारत में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है जिसे पंजाब में विशेष रूप से मनाया जाता हैl 

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कब मनाया जाता है:-

 यह पर्व मकर संक्रांति जो की सनातन संस्कृति में मनाया जाता है उससे एक दिन पहले मनाया जाता है।  की मकर संक्रांति पूर्वसंध्या पर इस त्यौहार का उल्लास रहता है। इस पर्व को हर साल 12 या 13 जनवरी को मनाया जाता है रात्रि में खुले स्थान में परिवार और आस-पड़ोस के लोग मिलकर आग के किनारे घेरा बना कर बैठते हैं। इस समय रेवड़ी, मूंगफली और लावा आदि खाए जाते हैं।

lohri 2020
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परिचय:- 

लोहड़ी हिंदी माह की मने तो पौस माह के अंतिम दिन, सूर्यास्त के बाद माघ मास संक्रांति से पहली रात यह पर्व मनाया जाता हैl इस त्यौहार को मनाने के लिए कुछ खास प्रकार के वस्तुओं का उपयोग किया जाता है जिसमें लकड़ी सूखे उपले और रेवाड़ी का इस्तेमाल किया जाता है इन वस्तुओं को जला कर के रात के समय में लोग  इस आग के चारों तरफ बैठ कर के बातें करते हैं और मूंगफली रेवड़ी लगा इत्यादि खाते हैंl

“लोहड़ी से संबद्ध परंपराओं एवं रीति-रिवाजों से ज्ञात होता है कि प्रागैतिहासिक गाथाएँ भी इससे जुड़ गई हैं। दक्ष प्रजापति की पुत्री सती के योगाग्नि-दहन की याद में ही यह अग्नि जलाई जाती है। इस अवसर पर विवाहिता पुत्रियों को माँ के घर से ‘त्योहार’ (वस्त्र, मिठाई, रेवड़ी, फलादि) भेजा जाता है। यज्ञ के समय अपने जामाता शिव का भाग न निकालने का दक्ष प्रजापति का प्रायश्चित्त ही इसमें दिखाई पड़ता है।” 

ये जानकारी विकिपीडिया से ली गई हैl 

इस त्यौहार विशेष रूप से  पंजाबियों तथा हरयानी लोग मानते है। यह लोहड़ी का त्यौहार पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू काश्मीर और हिमांचल में धूम धाम तथा हर्षोलाससे मनाया जाता हैं। यह त्यौहार मकर संक्राति से एक दिन पहले 13 जनवरी को हर वर्ष मनाया जाता हैं।

Lohri क्यों मनाया जाता है:-

यह पर्व सनातन धर्म के हिन्दू मान्यताओ के अनुशार पुराणों के आधार पर इसे सती के त्याग के रूप में प्रतिवर्ष याद करके मनाया जाता हैं. कथानुसार जब प्रजापति दक्ष ने अपनी पुत्री सती के पति महादेव शिव का तिरस्कार किया था और अपने जामाता को यज्ञ में शामिल ना करने से उनकी पुत्री ने अपनी आपको को अग्नि में समर्पित कर दिया था.

उसी दिन को एक पश्चाताप के रूप में प्रति वर्ष लोहड़ी पर मनाया जाता हैं और इसी कारण घर की विवाहित बेटी को इस दिन तोहफे दिये जाते हैं और भोजन पर आमंत्रित कर उसका मान सम्मान किया जाता हैं. इसी ख़ुशी में श्रृंगार का सामान सभी विवाहित महिलाओ को बाँटा जाता हैं.

इक अन्य कथा के अनुशार लोहड़ी का त्यौहार दुल्ला भट्टी की कहानी से जुड़ा हुआ है.  कहानी के अनुसार दुल्ला भट्टी नाम का एक डाकू था जो  बादशाह  अकबर के शासनकाल के दौरान पंजाब में रहते था । 

उन्होंने अमीरों और जमीदारों से धन लूटकर गरीबो में बाटने के अलावा, जबरन रूप से बेचीं जा रही हिंदू लड़कियों को मुक्त करवाया । साथ ही उन्होंने हिंदू अनुष्ठानों के साथ उन सभी लडकियों की शादी हिंदू लड़कों से करवाने की व्यवस्था की और उन्हें उपहार स्वरूप धन और वस्त्र भी दिया। जिस कारण वह पंजाब के लोगो के लिए एक हीरो बन गए.इसलिए आज भी लोहड़ी के गीतों में  दुल्ला भट्टी का आभार व्यक्त करने के लिए उनका नाम जरुर लिया जाता हैं।

इक और कथा की मने तो उसके अनुसर सुंदरी और मुंदरी नाम की दो बहन हुआ करती थी जिनके माता पिता भाई बहन कोई नहीं था उनका चाचा उनको आमिर सेठो के हाथ बेचना चाहता था इस बात का पता उस समय के मशहुर दंकू दूल्हा भठ्ठी को पता चला तो उन दोनों बहनों को छुड़ा कर के दोनो की पुरे रीती रिवाजो के साथ शादी कराईl  इसी कारन इस दिन सभी लोग अपने बहु बेटियों को सम्मान देते और वस्त्र आभुसन भी देते हैंl 

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Conclusion:

मैं आपसे यही बोल सकता हूं कि हमारी बताई हुई जानकारी आपको बहुत ही अच्छी लगी होगी और आप कोई भी lohri wishes and lohri 2020 इसमें से देख सकते हैं आपको बहुत ही अच्छी लगेगी

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