chanakya niti in hindi|chanakya ni pothi

chanakya niti in hindi: हैलो दोस्तों आज हम जानेंगे एक ऐसे व्यक्ति के बारे में नाम सुनते ही ये मालूम होता है की ओ कितने बड़े विद्वान् थेl

चाणक्य का जन्म परिचय

Chanakya
Chanakya

चाणक्य के जन्म के बारे में कोई सटीक जानकारी प्राप्त नहीं है लेकिन इतिहास के कुछ किताबों और Wikipedia की माने तो उनका जन्म लगभग 375 इसापूर्व पाटलिपुत्र में हुआ था जो की मगध यानि की आज के बिहार में है, जन्म के तरह ही उनकी मृत्यु के बारे में भी कुछ स्टिक नहीं कहा जा सकता है लेकिन माना जाता है की उनकी मृत्यु लगभग 283 ईसापूर्व पाटलिपुत्र में ही हुई उन्होंने तक्षशिला में अध्ययन किया और शिक्षा प्राप्त कीl

चाणक्य को कौटिल्य विष्णु गुप्त इत्यादि नामो से भी जाना जाता है चाणक्य का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था उन्होंने शिक्षा ग्रहण करने के बाद पाटलिपुत्र में ही जो की रजा ध्नानद के राज्य में स्थित था एक आचार्य और शिक्षक के रूप में कार्य करते थेl

इतिहास के अध्ययन में यह पता चलता है की जब सिंकंदर भारत पर आक्रमण करने आ रहा था तब उन्होंने उस समय के मगध के नन्द वंस के तत्कालीन रजा धनानंद के दरबार में जाकर यह सुचना देते हुए ये कहा की अखंड भारत को तोड़ने और जितने के संकल्प के साथ सिकंदर भारत पर आक्रमण करने आ रहा हैl

जिसे रोकने के लिए आप सभी भारत वर्स की रक्षा के लिए तैयार हो जाये और साथ दें इस बात पर क्रोधित होकर रजा धनानंद ने सैनिको को आदेश दिया की इस ब्राह्मण को राज दरबार से बहर निकल दिया जायl

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इस बात से क्रोधित हो आचार्य चाणक्य ने नन्द वंस के अंत करने का निर्णय लिया और उन्होंने एक बच्चा जिसका नाम चन्द्रगुप्त मौर्य था उसे शिक्षा देकर लड़ने योग्य बनाया उन्होंने अर्थशाश्त्र की रचना भी की जिसमे की राजनीती कूटनीति और रणनीति का विशेष उल्लेख मिलता हैl

चाणक्य चन्द्रगुप्त मौर्या के महा मंत्री के पद पर रहकर भी उनकी मंत्रिमंडल का कार्यभार देखा करते थे आचार्य इतने चतुर थे की वे चन्द्रगुप्त मौर्या के भोजन में विस मिलाया करते थे ताकि कोई विस कन्या भी उनपर आक्रमण न कर सके उस दौर में बहुत से रजा खुबशुरत कद्कियो को विस्कान्य के रूप में टियर करके दुसरे रजा के रजी में भेजते थे जिससे की युद्ध भी न करना पड़े और शत्रुयों का नाश भी हो जायl

आचार्य चाणक्य के अनुशार राज्य और धर्म सबसे ऊपर है राज्यहित के लिए कुछ भी करना सही मन गया है किसी भी व्यक्ति विशेस राज्य में मायने नहीं रखता राज्य का सर्वोपरि रजा होता है राज्य हित के लिए रजा जो भी फैसला लेता है सभी को मानी होना चैये ऐसा कौटिल्य ने अपे अर्थशाश्त्र में समझाने की कोशिश किया हैl

कौटिल्य के बारे में एक और कहानी सुनने को मिलती है उनका कहना है है की जो मनुष्य थक कर बैठ गया वः कभी आगे नहीं बढेगा एक बार चन्द्रगुप्त ने आचार्य से पूछा की आप प्रतिदिन कुषा के जड़ में छाछ क्यों डालते हैं तो कौटिल्य ने कहा की रस्ते में जाते वक्त ये मुझे चुभता है इसलिए इसे काटने से अच्छा है की इसको जड़ से ही ख़त्म कर दिया जय उनके कहने का तात्पर्य यह था की आप अपने दुश्मन को पूर्ण रूप से ख़त्म कर दो जिससे की फिर कभी वो आप पर आक्रमण न कर सकेl

Chanakya niti
chanakya niti in hindi

चाणक्य की कुछ नीतियाँ (Chanakya niti in hindi) निम्नलिखित हैं:-

  1. इक विद्वान् पंडित भी संकट में आ जाता है जब वह किसी मुर्ख उपदेश देता है वह डस्ट पत्नी का पालन पोसन करता हैं और वह किसी गरीब से घनिष्ट सम्बन्ध बना लेता हैl
  2. उस देश में निवास न करे जहा आपकी कोई इज्जत न करता हो जहाँ आप रोजगार नहीं कमा सकते जहाँ आपका कोई मित्र न हो और जहाँ आप किसी भा तरह का ज्ञान न प्राप्त कर सकते होंl
  3. ऐसे जगह कभी निवास न करे जहाँ ये पांच न हो:- धनवान वयति एक ब्राह्मण जो वैदिक शास्त्रों में निपुण हो एक रजा एक नदी एक चिकित्सक
  4. एक बुद्धिमान व्यक्ति को किसी हिन् घर की सुन्दर स्त्री से विवाह नहीं करना चाहिए क्योकि विवाह सदैव बराबरी के घरो में उचित होता हैl
  5. इन पांच पर कभी विश्वास ना करें:- नाख़ून और सिंह वाले पशु राजघराने के लोगों पर
  6. जिन व्यक्तियों के पास अष्ट्र शास्त्र हो नदियाँ औरते ( सिर्फ वैसी औरते जो कुटिला हों भरोसे के लायक न हों)

Final words:Chanakya niti in hindi

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